Tag: poem

शायर

“शायर कोई मैं खुदको कहता नहीं,बस मेरे लफ्ज़ लोगों को भा जाया करते हैं। राहों पर मैं अक्सर अकेले ही निकलता हूँ;महफ़िल जमाने लोग खुद ही आ जाया करते हैं।” –––––––––––––– “इन रातों से कोई शिकवा नहीं है,अगर मैं चाँद हूँ तो मेरा नूर तुम हो। नहीं कोई […]

পুৰণি এখনি ছবি

পুৰণি এখনি ছবি আৱেগৰ জোকাৰণীত হৃদয়ত গুপুতে ৰখাপুৰণি ছবি এখন খহি পৰিল,সময়ৰ আৱৰণে ঢাকি ৰখা ছবি খনেসতেজাতা পাই আকৌ টোপনি হৰিল। চিনেমাৰ ৰিল ঘুৰাদি অতীতৰ ক্ষণবোৰচকুৰ আগেৰে দৌৰিছে মাথোঁ দৌৰিছে,চিনাকী মুখ এখন, চিনাকী সময় কিছুমানচিনাকী অতীতে ভুমুকি মাৰিছে। আৱেগে স্মৃতিৰ চন্দুকটোৰ ঢাকনি খুলিলেতাতো আকৌ আৱেগৰেই টোপোলা,চিনাকী তাত ঢৌ […]

बादल

चलिए आज बादल की बात करते है,ऊपर से झुलस चुके उस बादल की,जो जमीन को झुलसता देख रोता है। गर सोच रहे हो तुम, क्या बादल रोता है?तो चींख भी सुनी होगी तुमने कभी-कभी,जो धरती को गले लगा, उसको फिर से भिगोता है। उस वक़्त ऐसा लगता है […]

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